मगही महोत्सव 2026 : मगही लघु फिल्म महोत्सव में 48 फिल्मों की एंट्री, ‘दोस्ती’ बनी विजेता

पटना: मगही कनेक्शन के तत्वावधान में आयोजित मगही महोत्सव के दूसरे दिन लघु फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें मगही भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। इस दौरान दिसंबर 2025 में घोषित लघु फिल्म निर्माण प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा की गई। प्रतियोगिता में कुल 48 लघु फिल्मों की प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं, जिनमें सामाजिक सरोकारों पर आधारित विषयों ने विशेष प्रभाव छोड़ा।

मगही लघु फ़िल्म महोत्सव के प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली टीम को सम्मानित करते प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. कुमार राजेश रंजन।

निर्णायक मंडल में फिल्म पटकथा लेखक शैबाल जी, बॉलीवुड निर्देशक अभिलाष शर्मा और अभिनेता बुल्लू कुमार शामिल रहे। प्रतियोगिता में ‘दोस्ती’ फिल्म को प्रथम पुरस्कार दिया गया, जो ग्रामीण परिवेश में लड़कियों की शिक्षा के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है। द्वितीय स्थान महिलाओं पर केंद्रित फिल्म ‘एक कप चाह’ को मिला, जबकि भाई-बहन के रिश्ते पर आधारित ‘आशाएं’ को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा ‘लॉस्ट’, ‘शहर से निमन गांव’ और ‘बनकहि’ को प्रशंसा पुरस्कार प्रदान किए गए।

मगही महोत्सव में लगे मगध की चित्र प्रदर्शनी को देखते अभिनेता अली खान।

विजेताओं को यूरोलॉजिस्ट डॉ. कुमार राजेश रंजन, वरिष्ठ पटकथा लेखक शैबाल जी, निर्देशक अभिलाष शर्मा, पाहुन हॉलीडेज के आदित्य, मगही महोत्सव के आयोजक रविशंकर उपाध्याय, विजेता चंदेल और विद्या सागर ने सम्मानित किया।

गया घराने की संगीत परंपरा पर चर्चा

महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत गया घराने की परंपरा और संगीत पर आधारित सत्र से हुई। प्रसिद्ध गायक राजन सिजुआर ने कहा कि पुरबिया गायकी में ठुमरी की परंपरा गया घराने के बिना अधूरी है। उन्होंने हारमोनियम वादन में सोनी जी के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया और उनकी विशिष्ट शैली की सराहना की।

उन्होंने सुझाव दिया कि बिहार के प्रत्येक प्रमंडल में संगीत शिक्षा के लिए गुरुकुल स्थापित किए जाएं, ताकि नई पीढ़ी को छात्रवृत्ति के माध्यम से प्रशिक्षण मिल सके और सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सके।

मगही सिनेमा के भविष्य पर मंथन

महोत्सव के पहले सत्र में मगही फिल्मों के इतिहास, वर्तमान और भविष्य पर विचार-विमर्श किया गया। अभिनेता अली खान ने कहा कि मगही सिनेमा के विकास के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

शैबाल जी ने बताया कि पहली मगही फिल्म ‘भैया’ 1961 में बनी थी, जिसके बाद ‘देवन मिसिर’ और ‘स्वाहा’ जैसी फिल्मों ने इस क्षेत्र में योगदान दिया, हालांकि निरंतरता बनाए रखना अभी भी चुनौती है।

फिल्म इतिहासकार प्रो. रविकांत ने कहा कि डिजिटल और एआई के दौर में मगही कंटेंट को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे निराला ने जानकारी दी कि मगही फिल्म निर्माण की शुरुआत 1900 के आसपास ही हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि 1930 में देव के राजा द्वारा छठ महापर्व पर मगही में फिल्म निर्माण कराया गया था, लेकिन संरक्षण के अभाव में वह आज उपलब्ध नहीं है।

दो दिवसीय इस महोत्सव का उद्घाटन पहले दिन बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने किया था। यह आयोजन नई प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ मगही भाषा, संस्कृति और सिनेमा के विकास की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ।