क्या सरकारी नियमों पर हो रही है विद्यालय का संचालन?

निजी विद्यालयों का संचालन बना व्यवसाय

अंबा औरंगाबाद। नियमों की अनदेखी कर शिक्षा के नाम पर व्यापार इन दिनों निजी स्कूलों की पहचान बनती जा रही है। कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र के अधिकांश निजी विद्यालय शिक्षा विभाग के कड़े मानकों और सरकारी गाइडलाइन्स को ठेंगा दिखाकर संचालित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सब कुछ जानते हुए भी शिक्षा विभाग मौन साधे बैठा है। जांच में पाया गया है कि शहर के कई स्कूल घनी आबादी वाले क्षेत्रों और संकरी गलियों में चल रहे हैं, जहां किसी आपात स्थिति में एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड का पहुंचना नामुमकिन है। कई स्कूलों के पास न तो अपना खेल का मैदान है और न ही अग्नि सुरक्षा का प्रमाणपत्र। बच्चों को क्षमता से अधिक छोटी कक्षाओं में बैठाया जा रहा है, जो उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
अभिभावकों की सबसे बड़ी शिकायत फीस की मनमानी वृद्धि और किताबों-यूनिफॉर्म को लेकर है। नियमानुसार स्कूल किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते, लेकिन पर्दे के पीछे का खेल जारी है। कमीशन के चक्कर में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोपी जा रही हैं, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर टूट रही है। प्रखंड क्षेत्र में दर्जनों ऐसे स्कूल हैं जिनके पास पूर्ण मान्यता नहीं है, फिर भी वे धड़ल्ले से स्कूलों का संचालन रहे हैं। इतना ही नहीं, लागत बचाने के लिए इन स्कूलों में अप्रशिक्षित शिक्षकों से काम लिया जा रहा है, जिसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। इस संबंध में जब जिला शिक्षा अधिकारी से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। जो भी स्कूल आरटीई (RTE) एक्ट और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।