मुखिया महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष पहुंचे कुटुम्बा

जनसंख्या दबाव और भौगोलिक दायरों से प्रभावित हुआ विकास कार्य

अंबा औरंगाबाद। भारतीय संविधान के 73 वें संशोधन में स्पष्ट किया गया है कि पंचायतों का परिसीमन जनगणना एवं भौगोलिक स्थिति के आधार पर किया जाएगा। बिहार में वर्ष 2001 में 1991 की जनगणना के अनुसार परिसीमन किया गया था। ‌उसके बाद अब तक परिसीमन नहीं किया गया। ऐसे में जनसंख्या का भारी दबाव और भौगोलिक दायरा अधिक होने के कारण पंचायतों की प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उक्त बातें मुखिया महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सह त्रिस्तरीय प्रतिनिधि संघ के संयोजक मिथलेश कुमार राय ने गुरुवार को कुटुंबा प्रखंड मुख्यालय के सभागार में बैठक के बैठक के दौरान कही। इस दौरान अध्यक्ष और प्रखंड क्षेत्र के मुखियाओं ने वीबी जी राम जी के लंबित बकाया भुगतान, एनएमएमएस के प्रशासनिक स्वीकृति, बीस योजनाओं के प्रतिबंध, पंचायतों का परिसीमन कराने समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों एवं समस्याओं पर चर्चा की। अध्यक्ष ने कहा कि जनसंख्या का दबाव और भौगोलिक दायरा को देखते हुए पंचायतों का परिसीमन 5000 की आबादी, वर्ष 2011 या 2026 – 27 की जनगणना के आधार पर हो। नगर निकायों के अपग्रेड तथा क्षेत्र विस्तार नवगठित होने के बाद उत्पन्न स्थितियों की समीक्षा करते हुए परिसीमन कराया जाए। वहीं वीबी जीरामजी योजना में विगत चार वित्तीय वर्ष के सामग्री का भुगतान नहीं होने के कारण छोटे-छोटे दुकानदारों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं पर अत्यधिक आर्थिक बोझ पड़ा है। इसलिए प्राथमिकता के आधार पर एक माह के अंदर शत-प्रतिशत भुगतान कराया जाए। एनएमएमएस दिन में एक बार लागू करते हुए प्रशासनिक स्वीकृति का बढ़ा हुआ दायरा दस लाख तथा बीस योजनाओं के प्रतिबंध से मुक्त किया जाए। अध्यक्ष ने कहा कि उपरोक्त समस्याओं को लेकर बिहार के सभी मुखियाओं द्वारा हस्ताक्षरित अनुरोध पत्र प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री समेत संबंधित विभाग के मंत्रियों को सौंपा जाएगा। बैठक में मुखिया संघ के प्रखंड अध्यक्ष मंजीत यादव, मुखिया अरविंद पासवान, तौहिद आलम, रविंद्र यादव, गुलाम सरवर, पुट्टू यादव, मुखिया प्रतिनिधि जितेंद्र पासवान आदि उपस्थित थे।