औरंगाबाद। बिहार के औरंगाबाद जिले में किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) के प्रावधानों की अनदेखी करने के मामले में Juvenile Justice Board ने सख्त रुख अपनाया है। बोर्ड ने पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिपोर्ट में विधि विरुद्ध किशोर के मामले का उल्लेख करने वाले दो पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत में आधिकारिक परिवाद दायर करने का आदेश दिया है।
जेजे बोर्ड के प्रधान दंडाधिकारी सह एसीजेएम सुशील प्रसाद सिंह ने शनिवार को यह आदेश जारी किया। मामला औरंगाबाद नगर थाना कांड संख्या-93/2018, जीआर-472/18 एवं जेजेबी वाद-120/25 से जुड़ा है।
पासपोर्ट वेरिफिकेशन में JJ Act उल्लंघन का आरोप
अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही के अनुसार, एक विधि विरुद्ध किशोर ने पासपोर्ट के लिए आवेदन दिया था। आवेदन के बाद पासपोर्ट कार्यालय ने औरंगाबाद नगर थाना से चरित्र सत्यापन रिपोर्ट मांगी थी। आरोप है कि तत्कालीन थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार और जांचकर्ता चंदन दास ने सत्यापन रिपोर्ट में किशोर से संबंधित वाद का उल्लेख कर दिया, जो किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 74(2) का उल्लंघन माना गया।
जेजे एक्ट के तहत किसी भी विधि विरुद्ध किशोर के रिकॉर्ड या वाद का सार्वजनिक या बाहरी संस्थाओं के समक्ष उल्लेख करना प्रतिबंधित है। इसके अलावा अपर पुलिस महानिदेशक (CID) बिहार के पत्रांक 127/2000 में भी स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि किशोर न्याय बोर्ड से जुड़े मामलों का उल्लेख बाहरी रिपोर्ट में नहीं किया जाए।
बोर्ड ने माना गंभीर मामला
Juvenile Justice Board ने मामले की जांच के बाद इसे गंभीर लापरवाही माना। बोर्ड ने दोनों पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74(2) के उल्लंघन के आरोप में व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद स्थित CJM कोर्ट में परिवाद संस्थित करने का आदेश दिया है।
साथ ही बोर्ड कार्यालय के लिपिक को निर्देश दिया गया है कि संबंधित सभी दस्तावेज मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में भेजे जाएं ताकि आधिकारिक परिवाद दायर किया जा सके।
क्या कहता है JJ Act?
किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत किसी विधि विरुद्ध किशोर की पहचान, रिकॉर्ड या उससे जुड़े मामलों को सार्वजनिक करना कानूनन प्रतिबंधित है। इसका उद्देश्य किशोर के भविष्य और पुनर्वास की प्रक्रिया को सुरक्षित रखना है।
