पटना: पोषण पखवाड़ा 2026 के समापन अवसर पर बिहार सरकार ने आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाओं के लिए एक अहम घोषणा की है। राज्य के उपमुख्यमंत्री सह समाज कल्याण मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि आने वाले दो महीनों के भीतर सभी आंगनबाड़ी कर्मियों को एंड्रॉयड आधारित मोबाइल फोन उपलब्ध कराए जाएंगे।
ज्ञान भवन में राज्य स्तरीय कार्यशाला
पटना स्थित ज्ञान भवन में आयोजित इस कार्यशाला में मंत्री ने “दिव्यांगता प्रोटोकॉल” और “दिव्यांगता जांच अनुसूची (DSS)” का शुभारंभ भी किया। इस नई पहल के जरिए 0-6 वर्ष के बच्चों में विकास संबंधी देरी की पहचान करना आसान होगा।

बच्चों के विकास पर खास फोकस
मंत्री ने बताया कि DSS के माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के मोटर स्किल, भाषा-संचार, संज्ञानात्मक विकास, सामाजिक व्यवहार, दृष्टि और श्रवण जैसे छह महत्वपूर्ण क्षेत्रों का आकलन कर सकेंगी। साथ ही आशा, एएनएम और आरबीएसके टीम के सहयोग से जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (DEIC) तक मजबूत रेफरल सिस्टम बनाया जा रहा है।
व्हाट्सएप कम्युनिटी चैनल लॉन्च
कार्यक्रम के दौरान “हमारे बच्चे, हमारा परिवार” नाम से व्हाट्सएप कम्युनिटी चैनल भी लॉन्च किया गया। इस प्लेटफॉर्म के जरिए पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और बच्चों के मानसिक विकास से जुड़ी जानकारी सीधे परिवारों तक पहुंचेगी।
विद्यारंभ प्रमाण पत्र का वितरण
कार्यक्रम में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) के तहत 6 वर्ष पूरे कर चुके बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। मंत्री ने आंगनबाड़ी कर्मियों के कार्यों की सराहना की।
बिहार बना देश में नंबर-1
समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी ने बताया कि पूरे राज्य में पोषण पखवाड़ा 2026 के दौरान 71 लाख से अधिक गतिविधियां आयोजित की गईं। बिहार ने पोषण माह 2025 के बाद एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है।
कुपोषण में सुधार के आंकड़े
सरकार के अनुसार बिहार में कुपोषण की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है:
- स्टंटिंग: 42.9% से घटकर 40.60%
- अंडरवेट: 41% से घटकर 19.2%
- वेस्टिंग: 22.9% से घटकर 7.7%
इन पांच क्षेत्रों पर रहा फोकस
पोषण पखवाड़ा के दौरान राज्य में पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया:
- मातृ एवं शिशु पोषण
- 0-3 वर्ष के बच्चों का मस्तिष्क विकास
- 3-6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षा
- स्क्रीन टाइम में कमी
- आंगनबाड़ी केंद्रों का सुदृढ़ीकरण
क्यों है यह पहल महत्वपूर्ण?
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे के जीवन के पहले 6 वर्ष सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इसी दौरान लगभग 85% मस्तिष्क विकास होता है। ऐसे में पोषण, देखभाल और समय पर हस्तक्षेप बेहद जरूरी है। बिहार सरकार की यह पहल न केवल आंगनबाड़ी सेवाओं को डिजिटल रूप से मजबूत करेगी, बल्कि बच्चों के शुरुआती विकास और कुपोषण से लड़ाई में भी बड़ा बदलाव ला सकती है।
