Bihar News: CM सम्राट साहब सुनिएं NDA की इस तेज तर्रार नेत्री वीणा कुशवाहा की दर्दभरी कहानी, उम्र के अंतिम पड़ाव पर दिलाइए इंसाफ?

औरंगाबाद(लाईव इंडिया न्यूज 18 ब्यूरो)। अपने जमाने में एनडीए की तेज तर्रार नेत्री रही शहर के कामा बिगहा निवासी वीणा सिंह कुशवाहा (64) उम्र के अंतिम पड़ाव में लकवाग्रस्त हाेने के बावजूद व्हीलचेयर के सहारे अधिकारियों के पास दस्तक देते हुए न्याय के लिए संघर्ष कर रही है। उन्हे रंज इस बात का है कि राज्य में एनडीए की सरकार और स्वजातीय सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री होने के बावजूद अधिकारी उनकी शिकायत को तरजीह नही दे रहे है।

उनकी शिकायत है कि औरंगाबाद के कामा बिगहा के सुनील कुमार मंडल फर्जी कागजात तैयार कर उनकी करीब 20 डिसमिल जमीन का बार-बार अपने  नाम पर दाखिल खारिज करा कर जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहे है। पहली बार सुनील मंडल ने फर्जी कागजात से इस जमीन का अपने नाम से तीन बार क्रमशः 08 जून 2015, 17 दिसम्बर 2016 और 08 मई 2018 को अंचल कार्यालय, औरंगाबाद से दाखिल खारिज करा चुके है।

हर बार जब वें इस पर वरीय अधिकारियों के समक्ष आपत्ति दायर करती है, तो दाखिल खारिज को रद्द कर दिया जाता है। जबकि वास्तविकता यह है कि जिस जमीन का वें फर्जी तरीके से दाखिल खारिज कराते है, वह उनकी खरीदगी जमीन है, जिस पर सुनील मंडल का कोई दावा नही बनता है। इसके बावजूद सुनील मंडल इस जमीन पर जबरन कब्जा करने को आमादा है।

सुनील मंडल ने इस जमीन पर दिसंबर 2025 में जबरन काम लगाया था, जिस पर उनकी आपत्ति के बाद नगर थाना ने 29 दिसंबर 2025 को मौके पर आकर काम रोकवाया था। इसके बाद हाल ही में सुनील मंडल ने 18 मई 2016 को इस जमीन पर पुनः निर्माण कार्य शुरू कराया था, जिस पर उनके द्वारा आपत्ति जताने के बाद औरंगाबाद के अंचल अधिकारी और नगर थाना ने काम रोकवाया था। काम रोकवा कर अधिकारियों के चले जाने के बाद उन्होने पुनः काम शुरू कराया, जिसे रात में आकर नगर थाना ने फिर से रोकवाया। साथ ही इस भूमि को लेकर औरंगाबाद के जिला अदालत में भी केस संख्या 28/2019 में सुनवाई चल रहा है। इसके बावजूद शारीरिक रूप से लाचार होने बावजूद मुझे बार-बार आर्थिक, शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।

उन्होने कहा कि दरअसल जब भी औरंगाबाद के अंचल अधिकारी या नगर थानाध्यक्ष बदल जाते है, तो सुनील मंडल सक्रिय होकर फर्जीबाड़ा को अंजाम दे डालते है। इस कारण वह बेहद परेशान और व्यथित होने के साथ ही अपनी ही सरकार में न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, लेकिन न्याय अभी कोसो दूर दिख रहा है।

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