पटना : मोकामा में गंगा नदी पर बने नए डबल लाइन रेल पुल से सोमवार रात पहली ट्रेन गुजरी। रात 1:40 बजे महानंदा एक्सप्रेस ने पुल पार किया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन ने करीब 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा पार की। नए पुल पर ट्रेनों के संचालन के लिए अधिकतम 140 किलोमीटर प्रति घंटे की गति निर्धारित की गई है।
राजेंद्र सेतु के समानांतर बने इस पुल के शुरू होने से मोकामा में गंगा पार रेल मार्ग की क्षमता बढ़ गई है। पुल पर दो नई रेल लाइनें शुरू होने के बाद इस रेलखंड पर कुल तीन लाइनें हो गई हैं। नए पुल पर परिचालन शुरू होने के बावजूद पुराने राजेंद्र सेतु से भी रेल सेवा जारी रहेगी।

रात 1:40 बजे गुजरी पहली ट्रेन
सोमवार रात 1:40 बजे महानंदा एक्सप्रेस नए डबल लाइन रेल पुल से गुजरी। यह पुल पर यात्री ट्रेन के परिचालन की पहली घटना थी। ट्रेन ने करीब 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पुल पार किया, जबकि पुल को 140 किमी प्रति घंटे तक की गति के लिए तैयार किया गया है।
परिचालन शुरू होने से पहले रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस), पूर्वी सर्किल, कोलकाता, गुरु प्रकाश ने शनिवार और रविवार को पुल का दो दिवसीय निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने नए पुल के साथ राजेंद्रपुल-हाथीदह ऊपर-रामपुर डुमरा रेलखंड और टाल स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया। निरीक्षण पूरा होने के बाद पुल को ट्रेनों के संचालन के लिए खोल दिया गया।
गंगा पर अब तीन रेल लाइनें
नया पुल राजेंद्र सेतु के समानांतर पटना की दिशा में करीब 50 मीटर की दूरी पर बनाया गया है। इसमें दो रेल लाइनें हैं। पहले गंगा पार करने के लिए राजेंद्र सेतु की एकमात्र रेल लाइन पर निर्भरता थी। अब दो अतिरिक्त लाइनें मिलने से यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के संचालन की क्षमता बढ़ गई है।
नई व्यवस्था से ट्रेनों की क्रॉसिंग, संचालन और समय पर आवाजाही में आने वाली दिक्कतें कम होंगी। रेलवे के अनुसार, परियोजना के पूरी तरह चालू होने पर इस क्षेत्र की रेल यातायात क्षमता में करीब 2.5 गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है।
2400 करोड़ की परियोजना, 15.5 किमी लंबाई
करीब 2400 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस परियोजना की कुल लंबाई लगभग 15.5 किलोमीटर है। इसमें गंगा नदी पर बना करीब 1.9 किलोमीटर लंबा मुख्य रेल पुल भी शामिल है। मुख्य पुल में नदी के ऊपर 17 स्टील स्पैन लगाए गए हैं।
परियोजना के तहत करीब 3.6 किलोमीटर लंबा रेल वायडक्ट, आठ छोटे पुल, दो सड़क उपरि पुल और तीन रेल ओवर रेल का निर्माण किया गया है। नए पुल और इससे जुड़े रेलखंड के शुरू होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के साथ उत्तर-पूर्वी राज्यों की ओर जाने वाली यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों को भी सुविधा मिलेगी।
67 साल पुराने राजेंद्र सेतु से भी जारी रहेगा रेल संचालन
गंगा पर बना राजेंद्र सेतु लंबे समय से इस रेल मार्ग का अहम हिस्सा रहा है। इसका शिलान्यास 1952 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था। दो दिसंबर 1959 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसका उद्घाटन किया था।
एकल रेल लाइन वाला यह पुल करीब 67 वर्षों से गंगा के इस हिस्से में रेल संपर्क बनाए हुए है। नए पुल के निर्माण के बाद भी इसे रेल संचालन से अलग नहीं किया जाएगा। दोनों पुलों के इस्तेमाल से ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध रहेंगे।
औपचारिक उद्घाटन की तैयारी
नए पुल पर ट्रेनों की आवाजाही शुरू होने के साथ परियोजना का परिचालन चरण शुरू हो गया है। अब इसके औपचारिक उद्घाटन की तैयारियां की जा रही हैं। संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नए रेल पुल का उद्घाटन करेंगे। हालांकि, उद्घाटन की आधिकारिक तारीख अभी तय नहीं हुई है।
