उत्तर कोयल नहर में डूबने से वृद्ध की मौत, रीमॉडलिंग में सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी का आरोप
अंबा (औरंगाबाद): कुटुंबा थाना क्षेत्र के ढ़ीबर पिपरा गांव के समीप रविवार को उत्तर कोयल नहर में डूबने से एक वृद्ध की मौत हो गई। मृतक की पहचान मिर्जापुर गांव निवासी 50 वर्षीय कृष्णा पासवान के रूप में की गई है। इस हादसे के बाद जहां एक ओर मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया है, वहीं दूसरी ओर नहर की री-मॉडलिंग और उसके नए डिजाइन को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
पैर फिसलने से हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मिर्जापुर निवासी कृष्णा पासवान रविवार सुबह घर से शौच के लिए निकले थे। आशंका जताई जा रही है कि नहर के किनारे अचानक उनका पैर फिसल गया, जिससे वे गहरे पानी में चले गए और डूबने से उनकी मौत हो गई। दोपहर में स्थानीय लोगों ने नहर के फाटक के पास एक शव को तैरता हुआ देखा, जिसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग और पोकलेन मशीन की मदद से काफी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहां उपस्थित ग्रामीणों ने कहा कि आदमी के साथ-साथ जानवरों की भी जान की खतरा हमेशा बनी रहेगी, आज स्थितियां यह है कि अगर कोई भी आदमी या जानवर नहर में गिर जाएगा तो उसका निकालना बहुत मुश्किल है
नए डिजाइन में हटीं सीढ़ियां, बढ़ा खतरा
इस दुखद घटना के बाद ग्रामीणों ने उत्तर कोयल नहर के आधुनिकीकरण और री-मॉडलिंग कार्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि नए निर्माण में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की गई है। पहले नहर में जगह-जगह बनी सीढ़ीनुमा ढलान किसी भी दुर्घटना की स्थिति में इंसानों और मवेशियों को बाहर निकलने का सहारा बनती थी। लेकिन नए डिजाइन में इन सीढ़ियों को हटा दिया गया है, जिससे नहर से बाहर निकलना नामुमकिन हो गया है।
ग्रामीणों की चेतावनी
नहर के नए स्वरूप के कारण अब तैरना जानने वाले लोग भी गिरने के बाद बाहर नहीं निकल सकते। अगर प्रशासन ने जल्द ही इस डिजाइन की समीक्षा कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए, तो भविष्य में ऐसी और भी कड़वी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।
चेतावनी के बाद भी सोया रहा प्रशासन
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब उत्तर कोयल नहर की री-मॉडलिंग का काम शुरू हो रहा था, तभी समाचार पत्रों के माध्यम से इस तरह की संभावित दुर्घटनाओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया था। इसके बावजूद संबंधित विभाग और जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और न ही सुरक्षा मानकों की कोई समीक्षा की। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि री-मॉडलिंग कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुधार किए जाएं।
