औरंगाबाद। साउथ बिहार पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनी लिमिटेड ने औरंगाबाद जिले के देव के कनीय विद्युत अभियंता सचिन कुमार को निलंबित कर दिया है। सचिन का बिजली बिल कम करने के एवज में पैसा मांगते वीडियो वायरल हुआ था। वायरल वीडियो की जांच के बाद बिजली कम्पनी ने यह कार्रवाई की है।
कम्पनी ने सचिन को निलंबित अवधि में पटना के शेखपुरा स्थित विद्युत आपूर्ति प्रमंडल मुख्यालय निर्धारित किया है। कंपनी के कार्रवाई के बाद विद्युत विभाग में हड़कंप मच गया है।

साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने अपने आदेश में कहा कि सचिन कुमार, कनीय विद्युत अभियंता, विद्युत आपूर्ति प्रशाखा, देव द्वारा पैसों का अवैध लेन-देन करने एवं कम्पनी को राजस्व क्षति पहुॅचाने के प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए उनके विरूद्ध संचालित की जाने वाली विभागीय कार्यवाही पर बिना प्रतिकूल प्रभाव डाले बिहार CCA Rules 2005 के नियम- 8 (1) (क) के तहत तत्क्षण प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
निलंबन अवधि के दौरान सचिन कुमार का मुख्यालय विद्युत आपूर्ति प्रमंडल, शेखपुरा निर्धारित किया जाता है। निलंबन अवधि में उन्हें CCA Rules-2005 के नियम-10 के तहत जीवन यापन भत्ता देय होगा।
बताते चले कि एक सप्ताह पूर्ण देव के पावर सब स्टेशन स्थित जेई के कार्यालय का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमे एक व्यक्ति द्वारा बिजली बिल कम करने के एवज में पैसा का डिमांड किया जा रहा था ।वीडियो वायरल होने के बाद कुछ मीडिया संस्थान ने इस विडियो को अपने यूट्यूब चैनल पर प्रकाशित किया था। वीडियो वायरल होने की खबर सनसनी की तरफ फैल गई । हालांकि वीडियो की आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई थी।
इस मामले को स्वतः संज्ञान लेते हुए अधीक्षण अभियंता औरंगाबाद, कार्यपालक अभियंता औरंगाबाद देव पावर सब स्टेशन पहुंचे और पूरे मामले की जांच की। मीडिया से बात करते हुए अधीक्षण अभियंता औरंगाबाद ने कहा था कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो लोग इसमें दोषी पाए जाएंगे उनपर कार्रवाई होगी। जांच के तीसरे दिन विभाग ने प्रथम दृष्टया इस मामले में दोषी पाते हुए जेई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है । देव पावर सब स्टेशन में कार्यरत मानव बल सुनील कुमार सहित अन्य पर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
इस मामले पर बात करते हुए स्थानीय समाजसेवी आलोक कुमार सिंह ने कहा है कि देव में बिजली विभाग के द्वारा स्थानीय दलालों के माध्यम से आम ग्रामीणों के साथ शोषण किया जा रहा था। कार्यालय से मोटी उगाही चरम पर थी। गरीब गुरबा लोगो पर प्राथमिकी दर्ज की जा रही थी और पैसे वालों से प्राथमिकी के नाम पर पैसा का उगाही की जा रही थी। कई ऐसी शिकायतें हैं जिससे विभाग अनिभिज्ञ है। अगर इसकी बेहतर ढंग से जांच हुई तो परत दर परत और भी कई मामले सामने आएंगे ।