शिक्षक दिवस पर विशेष : स्टूडेंट्स के डॉक्टर बनने के सपनों को पर लगा रहे मनीष प्रियदर्शी

पटना(लाइव इंडिया न्यूज 18 ब्यूरो)। छात्र जीवन से लेकर नौकरी-रोजगार हसिल करने तक स्टूडेंट्स में सफलता-असफलता पर बातें खुब होती है। वें हमेशा इस बात पर चर्चा करते है कि सफलता कैसे हासिल की जाएं, इसके लिए रास्ता क्या है, कौन उन्हे सफलता के लिए सही टिप्स दे सकते है, कौन सा सफल इंसान उन्हे सफलता का सक्सेस मंत्रा बता सकता है। इसकी उधेड़बुन में हर स्टूडेंट लगता है और सही जगह और सही गुरू मिलने पर उनके मार्गदर्शन में मेहनती स्टूडेंट्स अपने लक्ष्य को पाने में सफल भी हो जाते है।

स्ट्डेंट्स को सफलता का राह दिखाने वाले शिक्षकों की भी कोई कमी नही है। वही शिक्षकों की जमात में कुछ ऐसे भी शिक्षक है जो लीक से अलग हटकर है। स्टूडेंट्स को पढ़ाने का उनका अंदाज जुदां है। शिक्षक दिवस पर हम बात कर रहे है, राजधानी पटना के शिक्षा जगत की गलियों में अपने धुन में स्टूडेंट्स को सफलता की राह दिखाने में लगे एक गुमनाम से शिक्षक मनीष प्रियदर्शी की।

मनीष प्रियदर्शी पटना के शिक्षा जगत में कोई बड़ा नाम नही है लेकिन इनके इरादें बड़े है। स्टूडेंट्स को पढ़ाने के प्रति इनका समर्पण भाव दीवानगी की हद तक है। साधारण बैकग्राउंड से आनेवाले मनीष प्रियदर्शी है तो नालंदा जिले के सरमेरा प्रखंड के छोटे से गांव के प्यारेपुर के लेकिन पटना के शिक्षा जगत में बायोलॉजी पढ़ाने वाले शिक्षकों में उन्होने अपनी एक अलग पहचान बना रखी है।

शिक्षा जगत में उनकी शाइनिंग निरंतर बढ़ रही है। उनके बायोलॉजी पढ़ाने के अंदाज के स्टूडेंट्स कायल है। उनके स्टूडेंट्स ही उनके ब्रांड एम्बेसडर है। स्टूडेंट्स ही माउथ टू माउथ उनके बारे में अपने जूनियर्स को जानकारी दिया करते है। उनकी पकड़ सिर्फ बायोलॉजी पर ही नही है बल्कि फिजिक्स एवं केमिस्ट्री के सब्जेक्ट पर भी उनकी अच्छी कमांड है। यही वजह है कि दूसरे शिक्षकों से फिजिक्स-केमिस्ट्री की क्लास करनेवाले अपने स्टूडेंट्स की पूछने पर वे उनका डाउट क्लियर कर दिया करते है।

मनीष प्रियदर्शी से पढ़ी अंकिता-एम्स दिल्ली, दीप्ति-एनएमसीएच पटना, सोनू-पीएमसीएच, स्वास्तिक-आइएमएस बीएचयू, अमित-एनएमसीएच एवं सलोनी-एआइएमएसआर कोलकात्ता समेत सौ से अधिक बच्चें विभिन्न संस्थानों में एमबीबीएस के स्टूडेंट्स है। यह लिस्ट मनीष प्रियदर्शी के महज तीन वर्षों की बच्चों पर की गई मेहनत का परिणाम है। श्री प्रियदर्शी कहते है कि यह लिस्ट आगे चलकर और भी बड़ी होनेवाली है। वें कहते है कि मैं अपने गांव से पटना तो पढ़ लिखकर सरकारी सेवा हासिल करने आया था। उन दिनों उनके चाचा पटना में ही इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में अपने पिता के स्थान पर छोटे से पद पर कार्यरत थे। चाचा के यहां पटना में ही रहकर प्राइमरी से लेकर एमएससी तक की पढ़ाई पूरी की।

पढ़ाई के बाद उन्होने स्टूडेंट्स को सफलता पाने के लिए संघर्ष करते देख यह महसूस किया कि वें इतना तो जरूर सक्षम है कि मेडिकल फील्ड में जाने का इरादा रखने वाले स्टूडेंट्स के सपनों को उड़ान दे सकते है। इसी सोंच को धरातल पर उतारने के इरादे से पहले उन्होने दो साल तक कोटा और पटना में बंसल क्लासेज में सेवाएं दी पर उन्होने यह महसूस किया कि वहां उन्हे अपने मन मुताबिक बच्चों को पढ़ाने की आजादी नही है। लिहाजा उन्होने 2019 से स्वतंत्र रूप से शिक्षण कार्य शुरू किया। स्वतंत्र रूप से शिक्षण कार्य करने का ही यह परिणाम है कि मात्र तीन साल में उनके पढ़ाये सौ से अधिक स्टूडेंट्स आज विभिन्न मेडिकल कॉलेजो में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे है। वें कहते है कि बच्चों के सपनों को उन्होने अपना सपना बना लिया है। यही सपना अब उनका ध्येय है।