हिन्दी दिवस पर औरंगाबाद के छह व्यक्तियों को मिला सम्मान

औरंगाबाद(लाइव इंडिया न्यूज 18 ब्यूरो)। औरंगाबाद जिले में हिन्दी साहित्य के प्रचार-प्रसार एवं साहित्यिक कार्यक्रम के योगदान के मामले में साहित्यकुंज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

ये बातें पत्रकार कमल किशोर श्रीवास्तव ने साहित्यकुंज एवं औरंगाबाद जिला हिन्दी साहित्य सम्मलेन के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह सह अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के उद्घाटन के पश्चात विशिष्ट अतिथि के तौर पर संबोधन में कही। कार्यक्रम में अवकाश प्राप्त वयोवृद्ध पत्रकार उदय कुमार सिंह, डॉ. महेंद्र पांडेय, पत्रकार प्रेमेंद्र कुमार मिश्र, साहित्यकुंज के कार्यकारी अध्यक्ष श्रीराम राय एवं धनंजय जयपुरी ने लोगों को सही से हिन्दी लिखने, सही से बोलने एवं हिन्दी को रोजगार की भाषा बनाने पर विशेष बल दिया। इसके पूर्व साहित्यकुंज के प्रधान महासचिव एवं संचालक अरविन्द अकेला एवं कवि नागेन्द्र दूबे केशरी के कुशल संचालन एवं सच्चिदानंद सिन्हा कालेज के हिन्दी के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में आयोजित सम्मान समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का उद्घाटन अधिवक्ता उदय कुमार सिंह, पत्रकार कमल किशोर श्रीवास्तव एवं सिन्हा कॉलेज में हिन्दी विभाग के पूर्व प्रोफेसर सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस अवसर पर आयोजित सम्मान सामारोह में साहित्यकार महावीर अकेला को साहित्य के क्षेत्र में डॉ. शंकर दयाल सिंह सम्मान, डॉ. दीनानाथ गुप्ता को कला के क्षेत्र में डॉ. ललिता प्रसाद सम्मान, अमिताभ सिंह को समाजसेवा के क्षेत्र में डॉ. जनार्दन प्रसाद सिंहा सम्मान, कमल किशोर श्रीवास्तव को पत्रकारिता के क्षेत्र में नौलाख सिंह सम्मान, मो. निजाम कुरैशी को गंगा यमुनी संस्कृति के क्षेत्र में प्रदीप रौशन सम्मान एवं डॉ. ओम प्रकाश सोमी को अध्यात्म के क्षेत्र में डॉ. एसपी राय सम्मान से अंग वस्त्रं एवं सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के बाद आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में बोकारो से पधारी अनुराधा सरस्वती, डेहरी ओन सोन से पधारे प्रो. जवाहर जुझारु, कालिका सिंह, अरविंद अकेला, श्रीराम राय, प्रो. रामाधार सिंह, सुषमा सिंह, समुंद्र सिंह, मनोज मंजुल, धनंजय जयपुरी, नागेन्द्र दूबे केशरी, आरती सिंह चैहान, जनार्दन मिश्र जलज एवं हिमांशु चक्रपाणि सहित दो दर्जन कवियों, कवयित्रियों ने काव्य पाठ कर सम्पूर्ण वातावरण को काव्यमय बनाया।