औरंगाबाद : बिहार के औरंगाबाद जिले के उपहारा थाना क्षेत्र के खैरा गांव में एक अंतरजातीय विवाह से उपजे विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। इस सनसनीखेज वारदात में, लड़की के पिता (समधी) ने लड़के की मां (समधन) को बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला। इस घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है, और पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है।

घटना का विवरण
पुलिस के अनुसार, 27 जून 2025 को डायल 112 के माध्यम से उपहारा थाना को सूचना मिली कि खैरा गांव में एक महिला को बेरहमी से पीटा गया है। पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। मृतक की पहचान शांति देवी (पत्नी काशी सिंह), खैरा, उपहारा निवासी के रूप में हुई।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि शांति देवी के बेटे राजेश कुमार ने सोनम कुमारी से अंतरजातीय विवाह किया था, जिसे लेकर दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। इसी विवाद के चलते सोनम के पिता, मिथलेश पासवान, और शांति देवी के बीच तीखी नोकझोंक और मारपीट हुई, जिसके परिणामस्वरूप शांति देवी की मौत हो गई।
पुलिस की कार्रवाई
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, औरंगाबाद भेज दिया। फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम घटनास्थल से साक्ष्य जुटा रही है। मृतक के परिजनों के बयान के आधार पर उपहारा थाना में मिथलेश पासवान के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
औरंगाबाद के पुलिस अधीक्षक ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दाउदनगर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। SIT को सभी आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने और मामले की गहन जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अधीक्षक ने आश्वासन दिया कि दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
इलाके में तनाव, पुलिस की कड़ी निगरानी
इस घटना के बाद खैरा गांव और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है और इलाके पर कड़ी नजर रखी जा रही है। स्थानीय लोग इस घटना से स्तब्ध हैं और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।
अंतरजातीय विवाह और सामाजिक तनाव
यह घटना एक बार फिर अंतरजातीय विवाह से जुड़े सामाजिक तनावों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सामुदायिक जागरूकता और संवाद की आवश्यकता है। पुलिस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से लोगों में यह भरोसा जागा है कि कानून अपना काम करेगा।
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