नई दिल्ली, 24 मार्च 2025 : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी के एक स्टार्टअप ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए उन्नत AI-संचालित रोबोट विकसित किए हैं। ये रोबोट चुनौतीपूर्ण और दुर्गम इलाकों में वास्तविक समय में निर्बाध निगरानी प्रदान करने में सक्षम हैं। IIT गुवाहाटी द्वारा संचालित स्टार्टअप ‘दा स्पैटियो रोबोटिक लेबोरेटरी प्राइवेट लिमिटेड’ (DSRL) ने इस नवाचार को प्रस्तुत किया है, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) से भी मान्यता प्राप्त हुई है।

AI रोबोटिक्स से राष्ट्रीय सुरक्षा को नई ताकत
DSRL के सीईओ अर्नब कुमार बर्मन ने बताया कि यह स्वायत्त रोबोटिक प्रणाली पारंपरिक सुरक्षा उपायों जैसे ड्रोन, स्थिर कैमरे और पैदल या वाहन गश्त से कहीं आगे है। यह प्रणाली कठिन भूभाग और प्रतिकूल मौसम में भी प्रभावी ढंग से काम करती है। बर्मन ने कहा, “हमारा लक्ष्य अत्याधुनिक AI-संचालित निगरानी समाधान विकसित करना है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा की उभरती चुनौतियों का जवाब दे सके। यह रोबोटिक सिस्टम 24/7 निगरानी सुनिश्चित करता है, जो सीमा सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की निगरानी और रणनीतिक रक्षा अनुप्रयोगों में गेम-चेंजर साबित होगा।”
भारतीय सेना कर रही फील्ड टेस्टिंग
भारतीय सेना ने इन AI-संचालित रोबोट्स को अपनी निगरानी प्रणाली में शामिल करने के लिए फील्ड टेस्टिंग शुरू कर दी है। यह तकनीक भारत के रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। DRDO ने भी इसकी क्षमता को पहचाना है और इसे रक्षा क्षेत्र में एकीकरण के लिए उपयुक्त माना है।
IIT गुवाहाटी: इनोवेशन का केंद्र
IIT गुवाहाटी लंबे समय से तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। DSRL इस दिशा में एक और कदम है, जो स्वदेशी तकनीक के माध्यम से देश की सुरक्षा को सशक्त बना रहा है। यह स्टार्टअप न केवल तकनीकी क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बना रहा है।
क्यों है यह तकनीक खास?
- AI-संचालित निगरानी: वास्तविक समय में डेटा विश्लेषण और निर्णय लेने की क्षमता।
- कठिन इलाकों में काम: पहाड़ी क्षेत्रों और जंगलों में भी प्रभावी।
- 24/7 ऑपरेशन: मौसम या समय की बाधाओं से मुक्त।
- स्वायत्तता: मानव हस्तक्षेप के बिना स्वचालित संचालन।
भविष्य की संभावनाएं
यह तकनीक न केवल रक्षा क्षेत्र में, बल्कि आपदा प्रबंधन, औद्योगिक निगरानी और अन्य क्षेत्रों में भी उपयोगी साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI और रोबोटिक्स का यह संयोजन भारत को तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे ले जाएगा।
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