चंडीगढ़: पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने बुधवार को अपना चौथा बजट पेश किया। राज्य में बढ़ती नशे की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने ‘ड्रग्स सेंसस’ कराने का ऐलान किया है। इस सेंसस के जरिए नशे की वास्तविक स्थिति को समझकर एक ठोस और वैज्ञानिक रणनीति तैयार की जाएगी। वहीं, महिलाओं को हर महीने 1,100 रुपये देने का वादा इस बजट में भी पूरा नहीं हो सका, जिससे लोगों में निराशा देखी जा रही है।

ड्रग्स सेंसस: नशे के खिलाफ व्यापक रणनीति
पंजाब में नशा एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। सरकार अब 150 करोड़ रुपये की लागत से ड्रग्स सेंसस कराएगी, जो हर घर तक पहुंचेगा। इस जनगणना में लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, नशे का प्रचलन और नशा मुक्ति केंद्रों के कामकाज का डेटा जुटाया जाएगा। इस डेटा का इस्तेमाल अगले दो साल में नशे की समस्या को जड़ से खत्म करने और युवाओं के पुनर्वास के लिए किया जाएगा।
सीमापार से ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए बीएसएफ के साथ-साथ 5,000 होमगार्ड्स को दूसरी रक्षा पंक्ति के रूप में तैनात किया जाएगा। यह कदम नशे के खिलाफ सरकार की सख्ती को दर्शाता है।
महिलाओं को 1,100 रुपये का वादा: अभी भी इंतजार
बजट से पहले सबकी नजर इस बात पर थी कि क्या सरकार महिलाओं को प्रतिमाह 1,100 रुपये देने की घोषणा को पूरा करेगी। यह वादा पिछले तीन साल से लंबित है। वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने स्वीकार किया कि यह वादा अभी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन वित्त और सामाजिक सुरक्षा विभाग सर्वे कर रहा है और इसे जल्द लागू करने का दावा किया। हालांकि, मुफ्त बस यात्रा के लिए महिलाओं को 450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
टैक्स मुक्त बजट: 2.36 लाख करोड़ का आकार
वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने 2.36 लाख करोड़ रुपये का टैक्स मुक्त बजट पेश किया, जो पिछले साल से 32,000 करोड़ रुपये ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इस बजट से आम लोगों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
स्वास्थ्य बीमा में होगी बढ़ोतरी
‘मुख्यमंत्री सरबत बीमा योजना’ को और मजबूत करते हुए सरकार ने इसके दायरे और राशि को बढ़ाया है। अब पंजाब के सभी 65 लाख परिवारों को 10 लाख रुपये का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। पहले यह योजना 5 लाख रुपये तक सीमित थी और कुछ वर्गों के लिए ही उपलब्ध थी।
नशे की समस्या : 2018 में 25% लोग थे प्रभावित
पंजाब में नशा लंबे समय से बड़ी समस्या बना हुआ है। 2017 के विधानसभा चुनाव में AAP ने इसे खत्म करने का वादा कर सत्ता हासिल की थी, लेकिन नौ साल बाद भी यह चुनौती बरकरार है। 2018 के एक सर्वे में पता चला था कि राज्य की 25% आबादी नशे की चपेट में थी। कई बार अभिभावकों को भी पता नहीं होता कि उनके बच्चे ड्रग्स के शिकार हो चुके हैं। लोग लोकलाज के डर से इसकी जानकारी छिपाते हैं।
नशे के खिलाफ सरकार का दृढ़ संकल्प
ड्रग्स सेंसस और सीमा पर कड़ी निगरानी के साथ सरकार नशे को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। यह कदम पंजाब के युवाओं को नशे से मुक्त कर उनके भविष्य को संवारने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
(आप हमें Facebook, X, Instagram और Youtube पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. Whatsapp channel से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें. Google News पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें)