पटना में वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ मुस्लिम संगठनों का जोरदार विरोध, लालू-तेजस्वी भी पहुंचे

पटना : वक्फ संशोधन बिल 2025 के खिलाफ मुस्लिम संगठनों ने देशभर में विरोध तेज कर दिया है। इसी क्रम में बुधवार को बिहार की राजधानी पटना के गर्दनीबाग में बड़ी संख्या में मुस्लिम संगठन और उनके समर्थक एकजुट हुए। इस विशाल धरना प्रदर्शन में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) सहित आठ से अधिक प्रमुख संगठनों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से मुस्लिम नेता पटना पहुंचे, जिससे यह विरोध और भी व्यापक रूप लेता दिखाई दिया।

Waqf Amendment Bill

सुबह से ही जुटने लगी भीड़

प्रदर्शन की शुरुआत सुबह 11 बजे से तय थी, लेकिन निर्धारित समय से काफी पहले ही सैकड़ों लोग गर्दनीबाग में इकट्ठा हो गए। इमारत-ए-शरिया जैसे प्रभावशाली संगठनों के साथ-साथ राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता भी इस विरोध में शामिल हुए। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव ने धरना स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। दोनों नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और वक्फ संशोधन बिल को असंवैधानिक करार दिया। लालू प्रसाद यादव ने कहा, “हम इस बिल के खिलाफ आखिरी सांस तक लड़ेंगे। यह मुस्लिम समुदाय के हितों पर सीधा हमला है।” वहीं, तेजस्वी यादव ने इसे “मुसलमानों के अधिकारों का हनन” बताते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

नीतीश कुमार से अपील

पटना में हुए इस प्रदर्शन को न केवल केंद्र सरकार के खिलाफ एक बड़ा संदेश माना जा रहा है, बल्कि यह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के लिए भी एक अंतिम अपील के रूप में देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने नीतीश कुमार से मांग की कि वे संसद में इस बिल का पुरजोर विरोध करें। प्रदर्शन में मौजूद एक मुस्लिम आरजेडी नेता ने कहा, “मोदी सरकार वक्फ की संपत्तियों को अपने कब्जे में लेना चाहती है। यह बिल मुस्लिम समुदाय की जमीन और जायदाद पर डाका डालने की साजिश है।”

Waqf Amendment Bill Tejashwi yadav

वक्फ संशोधन बिल पर विवाद क्यों?

वक्फ संशोधन बिल 2025 को लेकर मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह विधेयक वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को खत्म करने और उसकी संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश है। AIMPLB और अन्य संगठनों का आरोप है कि यह बिल संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करता है। प्रदर्शनकारियों ने इसे “मुस्लिम विरोधी” करार देते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है।

राजनीतिक हलचल तेज

पटना के इस प्रदर्शन ने न केवल सामाजिक, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की मौजूदगी ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया है। वहीं, नीतीश कुमार और उनकी पार्टी पर भी सबकी नजरें टिकी हैं कि वे इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं। बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन के एक घटक के तौर पर जद(यू) की भूमिका इस बिल के संसद में पास होने या न होने में अहम हो सकती है।

आगे क्या?

पटना के गर्दनीबाग में हुए इस प्रदर्शन को मुस्लिम संगठनों ने एक शुरुआत बताया है। आने वाले दिनों में देश के अन्य हिस्सों में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इस बिल को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज होगा।

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