पटना। सड़क दुर्घटनाओं में फर्जी बीमा दावा करने वालों पर अब शिकंजा कसेगा। दुर्घटना में शामिल वाहनों में हेरफेर कर फर्जी दावे किए जाने की शिकायतों की जांच के लिए राज्य स्तर पर सीआइडी के अधीन विशेष समर्पित एसआइटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) गठित की गई है। बीमा कंपनियों की ओर से फर्जीवाड़े की आशंका वाले मामलों को एसआइटी जांच के लिए भेजा जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के स्तर पर सड़क दुर्घटना के मामलों में वाहन प्रत्यारोपण (Vehicle Implant) के माध्यम से फर्जी दावे किए जाने का मामला सामने आने के बाद यह व्यवस्था लागू की गई है। ऐसे फर्जी दावों से बीमा कंपनियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ता है और अंततः इसका असर आम उपभोक्ताओं के बीमा प्रीमियम पर पड़ता है।
फोटो-वीडियो साक्ष्य के बिना नहीं होगा चालान
यातायात नियमों के उल्लंघन पर चालान जारी करने की प्रक्रिया में अब फोटोग्राफिक और वीडियो साक्ष्य को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि चालान और यातायात उल्लंघन के बीच डिजिटल साक्ष्य के माध्यम से स्पष्ट संबंध स्थापित होना चाहिए। इससे कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।
वर्तमान में पूरे बिहार में पुलिस स्तर से एचएचसी, आईसीसी और एचपीवी के माध्यम से यातायात नियमों के उल्लंघन पर चालान जारी किए जा रहे हैं। यातायात ड्यूटी में तैनात पुलिस पदाधिकारियों को फोटो या वीडियो आधारित साक्ष्य के आधार पर मौके पर ही चालान जारी करना होगा। चालान में तारीख, समय और स्थान भी दर्ज रहेगा।
मोबाइल में फोटो रखकर बाद में चालान करने पर कार्रवाई
पुलिस मुख्यालय ने मोबाइल से वाहन की तस्वीर खींचकर उसे ड्राफ्ट मोड में रखने और सुविधा के अनुसार बाद में चालान जारी करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई है। केवल वाहन के नंबर प्लेट या निबंधन संख्या के आधार पर चालान नहीं किया जाएगा।
उल्लंघन की स्पष्ट तस्वीर लेना अनिवार्य होगा। उदाहरण के तौर पर बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट या यातायात नियम के किसी अन्य उल्लंघन की स्पष्ट फोटो या वीडियो साक्ष्य के रूप में सुरक्षित किया जाएगा। जांच में यदि किसी पुलिस पदाधिकारी की ओर से अधूरा साक्ष्य जुटाकर या मोबाइल में पहले फोटो लेकर बाद में चालान जारी करने की पुष्टि होती है तो उसके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
दुर्घटनाग्रस्त वाहन 24 घंटे में होंगे मुक्त
पुलिस मुख्यालय ने दुर्घटना में शामिल वाहनों को लेकर भी बड़ा निर्देश जारी किया है। सड़क दुर्घटना से जुड़े वाहनों की आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें हर हाल में 24 घंटे के भीतर मुक्त करना होगा। सभी थानों को इसका अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
वाहन मालिकों को वाहन मुक्त कराने में किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसके लिए जिला स्तर पर पुलिस उपाधीक्षक (यातायात) के अधीन व्यवस्था लागू की गई है। वाहन मुक्त कराने में समस्या या शिकायत होने पर पुलिस मुख्यालय के मोबाइल नंबर 9031829356 पर वाट्सएप, कॉल या एसएमएस के माध्यम से सूचना दी जा सकती है।
90 दिन से पुराने चालानों के लिए एकमुश्त निपटान योजना
90 दिनों से अधिक समय से लंबित यातायात चालानों के निपटारे के लिए राज्य सरकार ने “एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना-2026” को मंजूरी दी है। ऐसे लंबित चालानों का निष्पादन राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए परिवहन विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गई है।
12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में पुलिस स्तर से जारी लंबित चालानों में से करीब 66,964 चालानों का निपटारा किया गया। हालांकि, पुलिस मुख्यालय के अनुसार यह संख्या अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। अब लंबित चालानों के निष्पादन में तेजी लाने पर जोर दिया जा रहा है।
