Bihar Assembly Election 2025 : खत्म होगा प्रमोद सिंह का 14 वर्ष का राजनीतक  वनवास!; दिन रात मेहनत कर रहे रफीगंज के जदयू प्रत्याशी, लोगों का मिल रहा प्यार      

औरंगाबाद(लाइव इंडिया न्यूज 18 ब्यूरो)। 14 वर्षों से राजनीतिक वनवास झेल रहे रफीगंज के सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता प्रमोद सिंह को 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में पूरी उम्मीद है कि उनका वनवास इस बार खत्म हो जाएगा। यही वजह है कि सिंह रफीगंज से एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी के रूप में दिन रात मेहनत कर रहे है।       

कमात वाले घर से ईष्टदेव की पूजा कर जनसंपर्क के लिए निकल रहे प्रमोद सिंह

मदनपुर के कमात स्थित घर से सुबह ईष्टदेव की पूजा कर वें जनसंपर्क के लिए निकल रहे है और चुनाव प्रचार कर देर रात वापस लौट रहे है। इस दौरान प्रतिदिन वें आधा दर्जन छोटी-बड़ी नुक्कड़ सभा और कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करने के साथ ही करीब दो दर्जन गांवों में जनसंपर्क के माध्यम से जनता से सीधा संवाद कर रहे है और जनता भी उन्हें हाथोंहाथ ले रही है।   

खुद को वोट का सही हकदार बता रहे प्रमोद सिंह

हर सभा, बैठक और जनता से मिलने के दौरान वें इस बात को प्रमुखता से रख रहे है कि पिछले दो विधानसभा चुनाव में मिली हार के बावजूद मैं जनता के बीच रहा हूं। आपके सुख दुख में साथ देता रहा हूं। आपके लिए काम करते हुए आपके हक की लड़ाई लड़ता रहा हूं जबकि जिन्हे आपने चुनावी जीत दिलाकर विधायक बनाया, वें आपके बीच नही रहकर आपसे दूर रहे और आपका काम भी नही किया। मैं ही आपका कीमती वोट पाने का सही हकदार हूं।

हर जनता प्रमोद सिंह, मेहनताना मांग रहे जदयू प्रत्याशी

मैं आपसे वोट अपना मेहनताना मांग रहा हूं। मुझे मेहनताना के रूप में वोट देकर आप गर्व का अनुभव करेंगे क्योकि रफीगंज का हर एक व्यक्ति मेरे लिए प्रमोद सिंह है, जो आज भी है और कल भी रहेगा। सिर्फ मैं चुनाव नही लड़ रहा हूं बल्कि रफीगंज की हर जनता मेरे लिए प्रमोद सिंह बनकर चुनाव लड़ रही है। इस बार जब जनता खुद ही प्रमोद बनकर चुनाव लड़ रही है, तो मेरी हार कैसे हो सकती है। इस बार हर प्रमोद चुनाव जीत रहा है, यह बात सोलह आना सच है।                

प्रमोद सिंह का राजनीतिक सफर

सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में आने के बाद प्रमोद सिंह ने अपने जीवन का पहला विधानसभा 2015 में लोजपा प्रत्याशी के रूप में रफीगंज से ही लड़ा था। पहले चुनाव में भी वें दूसरे स्थान पर रहे थे। दूसरा चुनाव भी उन्होने रफीगंज से ही लड़ा लेकिन फर्क इतना रहा कि पार्टी द्वारा टिकट नही देने की मजबूरी में उन्हे निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा और इस चुनाव में भी वें 50 हजार से अधिक मत लाकर दूसरे स्थान पर रहे।

लगातार दो चुनाव से दूसरे स्थान पर रहने और उनके कारण सत्ताधारी गठबंधन के प्रत्याशी की लगातार दो बार हुई हार के कारण ही जदयू ने प्रमोद सिंह को इस बार लपक लिया और उन्हे एनडीए समर्थित जदयू उम्मीदवार बना कर चुनाव मैंदान में उतार दिया। प्रमोद सिंह के इस बार जदयू उम्मीदवार के रूप में आने से रफीगंज की राजनीतिक फिजां बदली बदली सी लग रही है।

यही वजह है कि प्रमोद सिंह राजनीतिक वनवास खत्म और चुनावी जीत पक्की होने का दावा कर रहे है। फिलहाल किसकी जीत और किसकी हार होती है, यह तो चुनाव परिणाम ही बताएगा और जीत की उम्मीद में हर उम्मीदवार क्षेत्र में अपना खून-पसीना बहाते फिर रहे है।