औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय में दो हत्याकांडों में सजा: चाचा की हत्या में दो भतीजों को आजीवन कारावास, जमीनी विवाद में चार अभियुक्तों को उम्रकैद

औरंगाबाद : औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय में दो अलग-अलग हत्याकांडों में सजा का ऐलान किया गया है। पहले मामले में चाचा की हत्या के लिए दो भतीजों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि दूसरे मामले में जमीनी विवाद के चलते एक व्यक्ति की हत्या के लिए चार अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा दी गई। दोनों मामलों में अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी और गवाहों के बयानों के आधार पर यह फैसला लिया गया।

पहला मामला: चाचा की हत्या में दो भतीजों को आजीवन कारावास

औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय में प्रधान जिला जज राजकुमार वन ने मदनपुर थाना कांड संख्या 67/03 (जी.आर. 1139/03, एसटीआर 306/03) की सुनवाई करते हुए अभियुक्तों कृष्णा राम और कृत राम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता (भादंवि) की धारा 302/34 के तहत दोषी पाया गया। इसके साथ ही प्रत्येक अभियुक्त पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना न चुकाने की स्थिति में एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

प्राथमिकी और घटना

लोक अभियोजक पुष्कर अग्रवाल ने बताया कि प्राथमिकी 26 जून 2003 को संजय राम द्वारा दर्ज की गई थी। संजय राम ने अपने बयान में कहा था कि उनके पिता महंग राम और चाचा सहंग राम के बीच सार्वजनिक कुएं तक आने-जाने के लिए गैर-मजरूआ जमीन पर रास्ते को लेकर विवाद हुआ था। इस विवाद में सहंग राम और उनके दोनों बेटों, कृष्णा राम और कृत राम, ने महंग राम के साथ मारपीट की, जिसके परिणामस्वरूप महंग राम गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। अभियोजन के दौरान सहंग राम की मृत्यु हो गई थी, इसलिए केवल कृष्णा राम और कृत राम पर मुकदमा चला।

अभियोजन और गवाही : अभियोजन पक्ष ने मामले में डॉक्टरों, अनुसंधानकर्ता (आई.ओ.) और स्थानीय ग्रामीणों की गवाही पेश की। 25 दिसंबर 2003 को अभियुक्तों पर भादंवि धारा 302/34 के तहत आरोप गठन किया गया था, और 10 जुलाई 2025 को उन्हें दोषी करार दिया गया।

बचाव पक्ष का तर्क : अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अभियुक्त परिवार के कमाऊ सदस्य हैं और उनकी मां लकवाग्रस्त है। साथ ही, उनके सहोदर भाई मजदूरी करते हैं। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर सजा की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद, न्यायाधीश ने अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद अभियुक्तों को अपनी करनी पर पछतावा होने की बात कही गई।

दूसरा मामला: जमीनी विवाद में हत्या के चार अभियुक्तों को उम्रकैद

औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय में जिला जज (अष्टम) मनीष जयसवाल ने उपहारा थाना कांड संख्या 80/20 (एसटीआर 206/21) की सुनवाई करते हुए चार अभियुक्तों—अशोक शर्मा उर्फ अशोक वर्मा, अबु उर्फ रंजीत कुमार, सतीश कुमार, और जय प्रकाश सिंह—को भादंवि धारा 302/149 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक अभियुक्त पर 15,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

प्राथमिकी और घटना : अपर लोक अभियोजक (एपीपी) प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि प्राथमिकी 2 दिसंबर 2020 को सुजीत कुमार (शंकरपुर, उपहारा) द्वारा दर्ज की गई थी। सुजीत कुमार ने अपने बयान में कहा कि जमीनी विवाद के कारण नामजद अभियुक्तों और कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने मिलकर उनके पिता श्रीनाथ शर्मा को गांव के पूर्व नहर पर ले जाकर लाठी, डंडे, और गंडासे से हमला किया और गोली मार दी। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और श्रीनाथ शर्मा को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, गोह ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने सुजीत कुमार के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की और अभियुक्तों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

अभियोजन और गवाही : अभियोजन पक्ष ने इस मामले में डॉक्टरों, अनुसंधानकर्ता, और सात अन्य गवाहों के बयान पेश किए। 14 जुलाई 2025 को चारों अभियुक्तों को दोषी करार दिया गया था। अभियोजन के दौरान एक अन्य अभियुक्त, बिष्णुपद सिंह, की 5 जून 2025 को मृत्यु हो गई थी, जिसके कारण उन पर मुकदमा नहीं चला।

न्यायालय का फैसला: न्यायाधीश मनीष जयसवाल ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद चारों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर सजा की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया।