- रांची में दो दिवसीय राष्ट्रीय डेयरी कार्यशाला का हुआ समापन, 300 से अधिक महिला किसान हुईं शामिल।
- आईएएस शशि रंजन ने अमूल मॉडल समझने के लिए महिला किसानों को आनंद (गुजरात) भेजने की घोषणा की।
- अब प्रमंडल स्तर पर भी आयोजित किए जाएंगे महिला डेयरी सशक्तिकरण कार्यक्रम।
- NDRI करनाल, BSIDT पटना और अमरेली के विशेषज्ञों ने दिए वैज्ञानिक पशुपालन के टिप्स।
रांची : झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और महिला किसानों को स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से रांची में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का बुधवार (30 सितंबर 2026) को सफल समापन हो गया। इस कार्यशाला में राज्य के सभी जिलों से आई 300 से अधिक महिला डेयरी किसानों ने आधुनिक दुग्ध उत्पादन और डेयरी प्रबंधन के नए गुर सीखे।
कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सहकारिता समितियों के निबंधक शशि रंजन (IAS) ने महिला किसानों के लिए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि झारखंड की महिला किसानों को आधुनिक डेयरी तकनीक, बेहतर प्रबंधन और सफल अमूल मॉडल का प्रत्यक्ष अनुभव कराने के लिए आनंद (गुजरात) एक्सपोजर विजिट पर भेजा जाएगा।

प्रमंडल स्तर पर भी लगेंगे ऐसे प्रशिक्षण शिविर
मुख्य अतिथि शशि रंजन ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी से ही ग्रामीण विकास को गति मिल सकती है। उन्होंने घोषणा की कि इस तरह के ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों का दायरा बढ़ाकर अब इन्हें प्रमंडल स्तर पर विभिन्न संबंधित विभागों के समन्वय से आयोजित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इसका लाभ उठा सकें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डेयरी विकास निदेशक डॉ. संजीव कुमार ने की, जबकि पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. रॉबिन टोप्पो विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

देशभर के शीर्ष विशेषज्ञों ने दिए वैज्ञानिक खेती और डेयरी के गुर
इस दो दिवसीय कार्यशाला में देश के अग्रणी अनुसंधान संस्थानों के डेयरी विशेषज्ञों ने भाग लिया।
- प्रमुख संस्थान: नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (NDRI, करनाल), बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी (BSIDT, पटना) और अमरेली (गुजरात) के विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।
- सिखाई गईं बारीकियां: विशेषज्ञों ने महिला किसानों को वैज्ञानिक दुग्ध उत्पादन, संतुलित पशु आहार, पशु रोग नियंत्रण, डेयरी उद्यमिता और दुग्ध उत्पादों के मूल्य संवर्धन (Value Addition) के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
- उपस्थित विशेषज्ञ: कार्यशाला में डॉ. कौशिक खमराई, डॉ. योगेश खेड़ा, डॉ. सूर्य मणि, डॉ. अनुपमा, डॉ. कुणाल और डॉ. दिवाकर समेत कई कृषि व डेयरी वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
300 से अधिक महिला किसानों का दिखा उत्साह
झारखंड के विभिन्न सुदूर ग्रामीण इलाकों से पहुंचीं 300 से अधिक महिला डेयरी किसानों ने कार्यशाला के अलग-अलग तकनीकी सत्रों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिला किसानों ने वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी शंकाओं का समाधान किया और डेयरी व्यवसाय को एक स्थायी आजीविका के रूप में अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में उप निदेशक डॉ. मनोज तिवारी ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों और प्रतिभागी महिला किसानों का धन्यवाद व्यक्त (Vote of Thanks) करते हुए कार्यक्रम के समापन की औपचारिक घोषणा की।
