‘वर्क डायरी’ खोलेगी कर्मियों के काम का हिसाब, अस्पतालों में दवाओं की औचक जांच से लापरवाही पर नजर
बदहाल स्वास्थ्य केंद्रों का होगा कायाकल्प, चहारदीवारी से लेकर रंग-रोगन व मरम्मत तक को मिली मंजूरी
कुटुम्बा प्रखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अब जवाबदेही का शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली दूर करने के साथ कर्मियों के कामकाज की निगरानी भी सख्त होगी। अब हर स्वास्थ्यकर्मी की ‘वर्क डायरी’ उसके काम का आईना बनेगी, जबकि अस्पतालों में दवाओं के स्टॉक की औचक जांच कर लापरवाही पर नजर रखी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग, पटना के निर्देश पर मंगलवार को रेफरल अस्पताल कुटुम्बा में हुई रोगी कल्याण समिति की बैठक में स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
बैठक में रिसियप, अंबा, महाराजगंज, कझपा व सिमरा एपीएचसी तथा बलिया, बैरांव, चोरहा, देशपुर, डुमरी, मटपा, सुही व तेतराईन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के कायाकल्प का रास्ता साफ किया गया। इन केंद्रों में चहारदीवारी निर्माण, रंग-रोगन और जरूरी मरम्मत कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।
डायरी में दर्ज होगा हर दिन का काम
बैठक का सबसे अहम फैसला सभी स्वास्थ्यकर्मियों के लिए वर्क डायरी अनिवार्य करना रहा। कर्मियों को माह के अंत में अपनी कार्य डायरी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को सौंपनी होगी। स्वास्थ्य प्रबंधक और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी प्रतिदिन कार्यों की समीक्षा करेंगे। इससे कर्मियों की जिम्मेदारी तय करने और कार्यों की निगरानी में मदद मिलेगी।
दवा स्टॉक पर भी होगी पैनी नजर
अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और स्टॉक की स्थिति की अब औचक जांच की जाएगी। समिति के सदस्य अचानक अस्पताल पहुंचकर दवाओं के स्टॉक का जायजा लेंगे। वहीं जन आरोग्य समिति की आय-व्यय विवरणी अगली बैठक में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
घर-घर अभियान की भी होगी निगरानी
एनसीडी और एनीमिया जांच के लिए चलाए जा रहे घर-घर अभियान की जमीनी स्थिति भी समिति के सदस्य क्षेत्र में जाकर देखेंगे। इसके अलावा नए अस्पताल भवन में रोगी कल्याण समिति के लिए अलग कार्यालय और एसी की व्यवस्था करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
बैठक में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नवल किशोर, समिति सदस्य विमला देवी, वीरेंद्र पांडेय, अभय कुमार, बबन भुइयां समेत अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
