नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘Universal Oneness Celebration’ में भारत की एकता और विविधता को उसकी सभ्यता और मूल स्वभाव से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ‘Unity and Diversity’ भारत के DNA में है। भारत की पहचान विविधता में एकता से है।

वसुधैव कुटुंबकम की भावना से आयोजित इस कार्यक्रम में भारत समेत दुनिया के विभिन्न देशों की सांस्कृतिक झलकियां देखने को मिलीं। कार्यक्रम में 30 देशों के 180 धार्मिक नेता एक मंच पर जुटे और मानव एकता, शांति तथा सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।
हिंदुत्व सभी धर्मों के सम्मान में विश्वास करता है
मोहन भागवत ने कहा कि मुसलमानों को भारत का हिस्सा न मानने की सोच हिंदुत्व की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व हर व्यक्ति के सम्मान और सभी धर्मों के प्रति समान भाव में विश्वास करता है। भारत की पहचान उसकी विविधता और सह-अस्तित्व की लंबे समय से चली आ रही परंपरा से बनी है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की पहचान जहां Pluralism यानी बहुलतावाद से जुड़ी है, वहीं भारत की पहचान विविधता में एकता से है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में सामाजिक और धार्मिक सद्भाव का संदेश पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।
धार्मिक नेताओं ने जारी किया पांच सूत्रीय एक्शन प्लान
‘Universal Oneness Celebration’ में शामिल धार्मिक नेताओं ने भविष्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी तय करने के लिए पांच सूत्रीय एक्शन प्लान का ऐलान किया। ‘एक दुनिया, एक मानवता’ के संदेश के साथ जारी ‘Call for Action’ प्रस्ताव में नफरत, अपमान और हिंसा को सही ठहराने के लिए धर्म के इस्तेमाल को खारिज किया गया।
धार्मिक नेताओं ने हिंसा या अपमान के खतरे का सामना कर रहे प्रत्येक समुदाय की गरिमा और सम्मान के लिए मजबूती से खड़े होने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में मानवता, शांति, धार्मिक सद्भाव और आपसी सम्मान को वैश्विक समाज की प्राथमिक जरूरत बताया गया।
