गुप्त नवरात्र में करें मन की आराधना, महाविद्या दीक्षा को बताया साधना का श्रेष्ठ माध्यम

पटना: गुप्त नवरात्र के पावन अवसर पर तंत्र साधना और देवी उपासना का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषाचार्य एवं धर्माचार्य पंडित मनोज पारीक ने कहा कि गुप्त नवरात्र दस महाविद्याओं की आराधना, साधना और दीक्षा के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। उनका कहना है कि सद्गुरु से प्राप्त महाविद्या दीक्षा साधक के आध्यात्मिक जीवन में नई ऊर्जा का संचार करती है और साधना के मार्ग को प्रशस्त करती है।

मनोज पारीक, ज्योतिष

पंडित पारीक ने बताया कि दस महाविद्याओं—काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला—का अपना-अपना विशिष्ट महत्व है। प्रत्येक महाविद्या जीवन के अलग-अलग आयामों से जुड़ी मानी जाती है। उन्होंने कहा कि महाकाली की आराधना साहस और आत्मबल, तारा ज्ञान एवं आध्यात्मिक उन्नति, त्रिपुरसुंदरी चारों पुरुषार्थों की सिद्धि, भुवनेश्वरी ज्ञान और वाणी की शक्ति, छिन्नमस्ता आत्मबल तथा संकटों पर विजय, त्रिपुर भैरवी निर्भयता, धूमावती कठिन परिस्थितियों से उबरने की शक्ति, बगलामुखी आत्मरक्षा और वाणी पर नियंत्रण, मातंगी कला एवं अभिव्यक्ति तथा कमला समृद्धि और सुख-शांति की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं।

उन्होंने कहा कि गुप्त नवरात्र के दौरान श्रद्धालु नियम, संयम और सात्विकता के साथ देवी की उपासना करें। किसी भी महाविद्या की साधना अथवा मंत्र-जप योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। बिना विधि-विधान के तांत्रिक साधनाओं का प्रयास उचित नहीं है।

पंडित मनोज पारीक ने बताया कि गुप्त नवरात्र में मां काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि इस अवधि में पूजा, जप, ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से मन की शुद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति का प्रयास करें। उनके अनुसार सच्ची श्रद्धा, सदाचार और गुरु के मार्गदर्शन में की गई साधना ही जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *