
डीयू के भीमराव अंबेडकर कॉलेज का 35वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न
नई दिल्ली : वर्तमान पीढ़ी का संघर्ष ही आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वर्णिम भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है। यह बात विजेन्द्र गुप्ता, अध्यक्ष, दिल्ली विधान सभा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज में आयोजित 35वें वार्षिकोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम में अकादमिक, शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।इस दौरान उत्साह और उपलब्धियों का माहौल देखने को मिला। समारोह के मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता रहे वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में भारत में सूरीनाम गणराज्य की राजनयिक सुनैना मोहन उपस्थित रहीं। सम्मानित अतिथियों में भारत पर्यावास केंद्र (नई दिल्ली) के महानिदेशक प्रो. के. जी. सुरेश, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संयुक्त सचिव डॉ. जी. एस. चौहान एवं महाविद्यालय शासी निकाय के कोषाध्यक्ष प्रो. कुलवीर गोजरा शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शासी निकाय के अध्यक्ष प्रो.रणजीत बेहेरा ने की।कार्यक्रम का संयोजन प्रो. दीपाली जैन एवं सह-संयोजन प्रो. ममता ने किया। संचालन प्रो. शशि रानी और प्रो. पूनम मित्तल ने किया।समारोह में बड़ी संख्या में शिक्षक, पूर्व प्राध्यापक, कर्मचारी एवं सैकड़ों विद्यार्थी उपस्थित रहे।
संघर्ष और परिश्रम से ही प्रगति संभव : विजेन्द्र गुप्ता
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज उन्हें अपने कॉलेज के दिनों की यादें ताजा हो गईं। उन्होंने पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि युवा पीढ़ी का संघर्ष ही देश को प्रगति के रास्ते पर आगे ले जाता है। हमारे पूर्वजों के संघर्षों से हमें स्वतंत्रता मिली और आज की पीढ़ी विरासत के साथ-साथ विकास के मार्ग पर चल रही है।
पेपरलेस विधानसभा और सौर ऊर्जा से संचालन
विजेन्द्र गुप्ता ने दिल्ली विधानसभा की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दिल्ली विधानसभा देश की पहली विधानसभा है जो पूर्णतः सौर ऊर्जा से संचालित होती है और जिसकी कार्यवाही पेपरलेस होती है। इससे प्रत्येक सत्र में लगभग सौ पेड़ों की रक्षा संभव हो पाती है। उन्होंने महाविद्यालय को विधानसभा के इतिहास पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक भी भेंट की। छात्रों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि समय किसी का इंतजार नहीं करता, आवश्यक है कि हम समय के साथ चलें और परिवर्तन को अपनाएं।
सूरीनाम में आज भी जीवित है भारतीय संस्कृति
भारत में सूरीनाम की राजनयिक सुनैना मोहन ने कहा कि औपनिवेशिक काल में सूरीनाम ले जाए गए भारतीय गिरमिटिया मजदूरों ने न अपनी भाषा छोड़ी और न संस्कृति। आज भी सूरीनाम की पांचवीं पीढ़ी भारतीय भाषा और परंपराओं को जीवित रखे हुए है।उन्होंने कहा कि सूरीनाम को ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है और वहां आज भी हिन्दी व्यापक रूप से बोली जाती है। उन्होंने दोनों देशों के विद्यार्थियों के बीच शैक्षणिक सहयोग के लिए महाविद्यालय के साथ समझौता करने की इच्छा भी जताई।

प्राचार्य ने प्रस्तुत की वार्षिक रिपोर्ट
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सदानंद प्रसाद ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि कॉलेज की शैक्षणिक, खेल-कूद एवं अकादमिक उपलब्धियां निरंतर बढ़ रही हैं और इसमें छात्रों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान है।
वार्षिकोत्सव में विद्यार्थियों को मिले विशेष पुरस्कार
सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी पुरस्कार: हर्ष कुमार सिंह (बीए, तृतीय वर्ष)
शीतला प्रसाद सिंह पुरस्कार: करुणा नयन चतुर्वेदी (हिंदी पत्रकारिता)
एनसीसी पुरस्कार: सक्षम पाण्डेय, हिना, किशन कुमार साहू
विभिन्न गोल्ड मेडल एवं मेरिट पुरस्कार रिदिमा, सौम्या पटेल, पलक पांडेय, शार्दुल पांडेय एवं इति श्रीवास्तव को प्रदान किए गए।
