Poetry: ख़ामोशी छाई थी; शाम गहराई थी, अजब तन्हाई थी

ख़ामोशी छाई थीशाम गहराई थीअजब तन्हाई थीमैं तुम्हें याद कर रही थीदीप जल रहे थेसितारे निकल…